दान का हिसाब

 प्रश्न 1 राजा किसी को भी दान क्यों नहीं देना चाहता था?
उत्तर :- राजा दान देते वक्त वह बहुत कंजूस था परंतु राजकोष का सारा धन वह अपने महल और अपने खर्चों के लिए ही उपयोग में करना चाहता था।
  प्रश्न2. राजदरबार में लोग मन-ही-मन राजा को बुरा कहते थे लेकिन वह राजा का विरोध क्यों नहीं कर पाते थे?
 उत्तर :-राजदरबार के  सभी लोग राजा से डरते थे इसलिए वे राजा का विरोध नहीं कर पाते थे।
 प्रश्न 3 राजसभा में सज्जन और विद्वान लोग क्यों नहीं जाते थे ?
उत्तर राजसभा में सज्जन और विद्वान लोगों का आदर नहीं होता था इसलिए वे राज्यसभा में नहीं आते थे।
प्रश्न 4 सन्यासी ने सीधे-सीधे शब्दों में भिक्षा क्यों नहीं माँँग ली?
 उत्तर राजा सीधे -सीधे शब्दों में भिक्षा माँँगने पर भिक्षा नहीं देता था इसलिए सन्यासी ने सीधे शब्दों में भिक्षा नहीं माँँगी।
प्रश्न 5 राजा को संन्यासी के आगे गिड़गिड़ाने की जरूरत क्यों पड़ी ?
उत्तर राजा संन्यासी के कहे अनुसार दान देने के लिए वचनबद्ध था और संन्यासी के कहे अनुसार दान में राजकोष का बहुत अधिक धन  निकल  रहा था। इस कारण राजा को संन्यासी के आगे  गिड़गिड़ाने की जरूरत पड़ी।
अंदाज़ अपना अपना
तुम नीचे दिए गए वाक्यों को किस तरह से कहोगे?
 क) दान के वक्त उनकी मुट्ठी बंद हो जाती थी ।
उत्तर दान के वक्त वह बहुत कंजूस हो जाता था ।
ख) हिसाब देख कर मंत्री का चेहरा फीका पड़ गया ।
उत्तर हिसाब देख कर मंत्री घबरा गया ।ग)संन्यासी की बात सुनकर सभी  की जान में जान आई ।
उत्तर संन्यासी की बात सुनकर सब को राहत मिली ।
घ)लाखों रुपए राजकोष में मौजूद है जैसे धन का सागर हो ।
उत्तर लाखों रुपए राजकोष में मौजूद है जैसे धन का भरा-पूरा भंडार।
प्रश्न 7. तुम्हारे विचार से राजदरबार में किस-की क्या-क्या जिम्मेदारियांँ होगी?
उत्तर:- मंत्री:- राजा को प्रशासनिक कार्यों में सलाह देता होगा और राज्य का कामकाज देखता होगा।
 भंडारी :-राजकोष का रखरखाव करता होगा और देश में पैसा कहांँ- कहाँँ खर्च होता है इसका हिसाब -किताब रखता होगा।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दोस्त की पोशाक

पढक्कू की सूझ

सुनीता की पहिया कुर्सी